
जेन स्ट्रीट पर सेबी की बड़ी कार्रवाई — डेरिवेटिव्स मार्केट में कथित हेरफेर का मामला
मुंबई, भारत — भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वैश्विक हाई-फ्रीक्वेंसी और प्रोपराइटरी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट ग्रुप (Jane Street Group) के खिलाफ एक बड़ा और चर्चित अंतरिम आदेश (Interim Order) जारी किया है। यह मामला भारतीय प्रतिभूति बाजार, खासकर डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कथित बाजार हेरफेर (Market Manipulation) से जुड़ा हुआ है, जिसमें ₹4,843.57 करोड़ के अवैध लाभ अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं।
3 जुलाई 2025 को जारी इस आदेश ने न केवल बाजार सहभागियों को चौंका दिया, बल्कि संस्थागत निवेशकों, कानूनी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय नियामकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।
पृष्ठभूमि — जेन स्ट्रीट कौन है और मामला कैसे शुरू हुआ?
जेन स्ट्रीट ग्रुप एक ग्लोबल प्रोपराइटरी ट्रेडिंग फर्म है, जो जटिल इन-हाउस एल्गोरिथ्म और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) तकनीकों का इस्तेमाल करती है। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और लंदन, हांगकांग, सिंगापुर जैसे प्रमुख वित्तीय केंद्रों में इसके कार्यालय मौजूद हैं।
कंपनी इक्विटी, बॉन्ड, ETF, और डेरिवेटिव्स जैसे विभिन्न वित्तीय उत्पादों में सक्रिय रूप से ट्रेड करती है। भारतीय बाजार में इसकी मौजूदगी JSI Investments Pvt Ltd और JSI2 Investments Pvt Ltd जैसी सहायक कंपनियों के माध्यम से है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब सेबी ने बैंक निफ्टी और निफ्टी इंडेक्स के डेरिवेटिव्स एक्सपायरी दिनों में असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न को नोटिस किया। जांच में पाया गया कि जेन स्ट्रीट समूह ने कुछ खास समय पर कैश मार्केट में बड़े और असामान्य ऑर्डर प्लेस किए, जिनका उद्देश्य कथित तौर पर डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस को प्रभावित करना था।
सेबी का अंतरिम आदेश — 3 जुलाई 2025
सेबी के 104 पन्नों के अंतरिम आदेश के अनुसार:
- जेन स्ट्रीट की भारतीय सहायक कंपनियों और संबद्ध वैश्विक इकाइयों ने समूह के रूप में काम करते हुए एक्सपायरी दिनों में बाजार को प्रभावित करने वाले सौदे किए।
- इन सौदों का तर्कसंगत आर्थिक उद्देश्य नहीं था और उनका आकार व समय ऐसा था कि वे सूचकांक (Index) की कीमत को प्रभावित कर सकते थे।
- सेबी का दावा है कि इस हेरफेर से जेन स्ट्रीट समूह को ₹4,843,57,70,168 का लाभ हुआ।
अंतरिम आदेश के तहत निर्देश:
- ₹4,843.57 करोड़ की विवादित राशि एक एस्क्रो खाते (Escrow Account) में जमा करना, जिस पर सेबी का लियन होगा।
- तत्काल प्रभाव से भारतीय बाजार में जेन स्ट्रीट समूह की ट्रेडिंग पर रोक।
- आगे किसी भी धोखाधड़ी, हेरफेर या अनुचित व्यापारिक प्रथा में शामिल न होने का आदेश।
- स्टॉक एक्सचेंजों को आदेश कि वे जेन स्ट्रीट की सभी भविष्य की ट्रेडिंग गतिविधियों की करीबी निगरानी करें।
14 जुलाई और 21 जुलाई के अपडेट — आंशिक राहत
14 जुलाई 2025 को सेबी ने एक प्रेस रिलीज़ (PR No. 40/2025) के जरिए बताया कि जेन स्ट्रीट ने एस्क्रो खाते में पूरी राशि जमा कर दी है।
इसके बाद, 21 जुलाई 2025 को, आदेश के पैरा 62.11 के तहत, सेबी ने ट्रेडिंग पर लगा प्रतिबंध हटा दिया — लेकिन कड़े शर्तों के साथ:
- कंपनी को किसी भी तरह की फ्रॉडulent या मैनिपुलेटिव ट्रेडिंग से बचना होगा।
- डेरिवेटिव्स से जुड़ी किसी भी पहचाने गए पैटर्न का उपयोग नहीं किया जा सकता।
- एक्सचेंजों को इनकी ट्रेडिंग की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय नियामकीय सहयोग — SEC की भूमिका
इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने सेबी से जांच से संबंधित जानकारी मांगी।
दोनों संस्थाएं IOSCO Multilateral Memorandum of Understanding (MMoU) के तहत साइन की हुई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभूति नियामकों के बीच सूचना साझा करने की अनुमति देता है।
यह पहला मौका नहीं है जब सेबी और अमेरिकी नियामकों के बीच ऐसा सहयोग हुआ है। वकील संदीप पारेख के अनुसार, दो दशक पहले UBS केस में भी इसी फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
जेन स्ट्रीट का पक्ष
जेन स्ट्रीट ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि:
- उनकी ट्रेडिंग गतिविधियां वैध मार्केट मेकिंग और हेजिंग का हिस्सा थीं।
- उन्होंने एस्क्रो खाते में राशि जमा की है, लेकिन यह दोष स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
- वे फिलहाल अंतरिम आदेश को कोर्ट में चुनौती नहीं दे रहे हैं, लेकिन भविष्य में कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।
कानूनी और नियामकीय पहलू
सेबी ने आदेश में Balance of Convenience (सुविधा का संतुलन) का हवाला दिया। इसका मतलब है कि:
- बाजार की अखंडता को तत्काल नुकसान से बचाने के लिए प्रतिबंध जरूरी था।
- चूंकि पूरी राशि एस्क्रो में है, इसलिए आंशिक राहत (ट्रेडिंग की अनुमति) दी जा सकती है, लेकिन निगरानी जारी रहेगी।
- जांच पूरी होने के बाद, अगर आरोप साबित होते हैं, तो अंतिम आदेश में जुर्माना, लाभ की जब्ती, और आगे का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
बाजार और निवेशकों पर असर
इस घटना का असर कई स्तरों पर महसूस किया गया:
- संस्थागत निवेशक सतर्क हुए — बड़े एल्गोरिथमिक ट्रेडर्स और HFT फर्मों के व्यवहार पर अधिक ध्यान।
- डेरिवेटिव्स बाजार में वॉल्यूम पर असर — एक्सपायरी के दिनों में असामान्य वॉल्यूम पैटर्न पर ब्रोकर्स और एक्सचेंज की नजर।
- नियामकीय सख्ती का संदेश — सेबी ने साफ कर दिया कि जटिल एल्गोरिथ्म और वैश्विक नेटवर्क के बावजूद, कोई भी खिलाड़ी निगरानी से बाहर नहीं है।
भविष्य की दिशा
मामला अभी जांच के अधीन है और अंतिम निर्णय आने में समय लगेगा। कुछ संभावित परिदृश्य हैं:
- आरोप साबित होने पर — भारी जुर्माना, स्थायी ट्रेडिंग प्रतिबंध, और अन्य बाजारों में भी जांच।
- आरोप खारिज होने पर — कंपनी की साख को नुकसान की भरपाई और संभवतः सेबी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई।
- अंतरराष्ट्रीय जांच का विस्तार — चूंकि SEC भी इस मामले में रुचि ले रहा है, इसलिए अमेरिका और अन्य बाजारों में भी समान पैटर्न की जांच हो सकती है।
निष्कर्ष
जेन स्ट्रीट मामला भारतीय बाजार में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और एल्गोरिथमिक रणनीतियों के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े जोखिमों को उजागर करता है।
सेबी की कार्रवाई यह दर्शाती है कि:
- वह बड़े वैश्विक खिलाड़ियों पर भी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग का इस्तेमाल कर सीमा-पार मामलों की जांच की जा सकती है।
- बाजार की पारदर्शिता और अखंडता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अगले कुछ महीनों में इस मामले की दिशा यह तय करेगी कि भारतीय डेरिवेटिव्स बाजार में जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों के लिए नियामकीय रुख कितना सख्त होगा।










